MitraClip : 84 वर्षीय मरीज का जटिल हार्ट वाल्व उपचार सफल

MitraClip: Successful Treatment of Complex Heart Valve Condition in an 84-Year-Old Patient MitraClip: Successful Treatment of Complex Heart Valve Condition in an 84-Year-Old Patient
MitraClip: Successful Treatment of Complex Heart Valve Condition in an 84-Year-Old Patient

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा ने 84 वर्षीय गंभीर हार्ट फेलियर मरीज का सफल उपचार किया है
अस्पताल के अनुसार, क्षेत्र में यह इस प्रक्रिया का पहला मामला है

न्यूज़म ब्यूरो

ग्रेटर नॉएडा, 04 सितंबर।  MitraClip प्रक्रिया के जरिए फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में 84 वर्षीय गंभीर हार्ट फेलियर मरीज का लीक हो रहा मित्रल वाल्व सफलतापूर्वक ठीक किया गया। अस्पताल के अनुसार, क्षेत्र में यह इस प्रक्रिया का पहला मामला है।

MitraClip से किया गया लीक वाल्व का उपचार

मरीज जब अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी थी।
वह शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके थे और बार-बार हार्ट फेलियर की शिकायत थी।

जांच में सामने आया कि उनका मित्रल वाल्व सही तरीके से काम नहीं कर रहा था।
इस कारण हृदय से रक्त का कुछ हिस्सा पीछे की ओर लौट रहा था।

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डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का हृदय केवल 30 से 35 प्रतिशत क्षमता से काम कर रहा था।
ऐसे में वाल्व लीकेज ने उनकी स्थिति को और जटिल बना दिया था।

MitraClip के लिए क्यों चुनी गई कम चीरे वाली प्रक्रिया

मरीज की उम्र 84 वर्ष थी और उनका हृदय काफी कमजोर था।
फरवरी 2026 में उनकी हृदय धमनियों में दो स्टेंट भी डाले गए थे।

इसके अलावा उनका केवल एक गुर्दा काम कर रहा था।
उन्हें प्रोस्टेट बढ़ने और गंभीर मूत्र संक्रमण की समस्या भी थी।

इन परिस्थितियों में पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक माना गया।
इसलिए मेडिकल टीम ने कम चीरे वाली प्रक्रिया का विकल्प चुना।

MitraClip प्रक्रिया में बिना सीने पर बड़ा चीरा लगाए उपचार

डॉक्टरों ने पैर की धमनी के रास्ते एक छोटी क्लिप हृदय तक पहुंचाई।
पूरी प्रक्रिया तीन आयामी इमेजिंग तकनीक की मदद से की गई।

मरीज के लीक हो रहे वाल्व पर विशेष क्लिप लगाई गई।
अस्पताल के अनुसार, प्रक्रिया में मित्रल क्लिप एक्सटीडब्ल्यू जी4 का इस्तेमाल किया गया।

क्लिप लगाने के बाद वाल्व का रिसाव कम हुआ।
पूरी प्रक्रिया के दौरान कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।

मरीज की स्थिति स्थिर रहने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
कार्डियोलॉजी टीम अब उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है।

MitraClip के बाद मरीज के स्वास्थ्य में सुधार

उपचार के बाद मरीज के लक्षणों में सुधार देखा गया।
डॉक्टरों के अनुसार, वाल्व लीकेज का इलाज समय पर होना जरूरी था।

अगर रिसाव बना रहता, तो कमजोर हृदय पर दबाव और बढ़ सकता था।
इससे हार्ट फेलियर की स्थिति बिगड़ने का खतरा रहता।

बार-बार अस्पताल में भर्ती होने और स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका भी बढ़ सकती थी।
समय पर किए गए उपचार से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिली।

डॉक्टर ने बताया हाई रिस्क मामला

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के वरिष्ठ कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने मामले को चुनौतीपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि मरीज की उम्र और गंभीर हार्ट फेलियर बड़ी चुनौतियां थीं।
इसके साथ हालिया हृदय उपचार और एक ही गुर्दे का काम करना भी महत्वपूर्ण था।

उन्होंने कहा कि ऐसे मरीज में ओपन-हार्ट सर्जरी करना कठिन हो सकता है।
कम चीरे वाली तकनीक ने उपचार का अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराया।

डॉक्टर के अनुसार, सही मरीज का चयन और उन्नत तकनीक ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

MitraClip से फोर्टिस ने बढ़ाई कार्डियक सेवाएं

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की सुविधा निदेशक बिंदु शर्मा ने टीम के समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि जटिल हृदय रोगों में तकनीक और विशेषज्ञ अनुभव का बेहतर तालमेल जरूरी है।
अस्पताल अपनी कार्डियक सेवाओं को लगातार मजबूत करने पर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मरीजों को उनके नजदीक उन्नत उपचार विकल्प उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

84 वर्षीय मरीज के मामले में टीम ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार कम चीरे वाली प्रक्रिया अपनाई।
उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार को महत्वपूर्ण परिणाम बताया गया।

अस्पताल के अनुसार, यह मामला गंभीर मरीजों के लिए विशेष हृदय उपचार की भूमिका को भी दर्शाता है।

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