CJP प्रदर्शन में शामिल होने पर छात्र को 5 लाख रुपये का नोटिस, SFI ने सरकार पर लगाया डराने का आरोप

गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग के मामले में नोटिस, छात्र ने आरोपों से इनकार कर कहा- प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से लिया था हिस्सा

Rahul Gupta

ग्रेटर नोएडा, 8 सितंबर। ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना महंगा पड़ गया है। ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने शांति भंग से जुड़े मामले में छात्र को 5 लाख रुपये का नोटिस जारी किया है। अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं।

प्रदर्शन के बाद जारी हुआ नोटिस

जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट-3 की ओर से अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया। यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर हुए CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान अक्षत त्रिपाठी ने छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने और उन्हें एकजुट करने का प्रयास किया। हालांकि, अक्षत ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था।

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प्रदर्शन के दौरान घायल होने का भी दावा

अक्षत त्रिपाठी के मुताबिक, प्रदर्शन के समय गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी। ऐसे में वह नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहे थे।

उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल भी हुए थे। इस मामले में छात्र संगठन SFI ने अक्षत को जारी किए गए नोटिस की कड़ी आलोचना की है।

SFI ने सरकार पर लगाया दबाव बनाने का आरोप

SFI ने आरोप लगाया है कि नोटिस विरोध करने के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को डराने और उन पर दबाव बनाने की कोशिश है। संगठन के मुताबिक, जंतर-मंतर के प्रदर्शन में पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।

SFI ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर असहमति की आवाज को दबाने के लिए कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

छात्र संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है। SFI ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर हमले किए गए, जिसका उद्देश्य आंदोलन को बाधित करना था।

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