UNSC : भारत की स्थायी सीट के 5 बड़े आधार

PM Modi Raises India’s Demand for UNSC Reform and Permanent Membership PM Modi Raises India’s Demand for UNSC Reform and Permanent Membership
PM Modi Raises India’s Demand for UNSC Reform and Permanent Membership

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का दावा लगातार मजबूत हो रहा है

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, परमाणु क्षमता और शांति अभियानों में योगदान भारत के पक्ष में बड़े आधार हैं

न्यूज़म ब्यूरो

नई दिल्ली, 15 सितंबर। UNSC में भारत लंबे समय से स्थायी सदस्यता और सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है। जानिए भारत की दावेदारी के पांच मजबूत कारण और वीटो पावर को लेकर क्यों चर्चा तेज है।

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स मंच पर भी यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार को अब टाला नहीं जा सकता। भारत का कहना है कि वैश्विक संस्थाओं में वर्तमान दुनिया का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अहम भूमिका निभाती है। इसकी स्थापना दूसरे विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1945 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र में फिलहाल 193 सदस्य देश शामिल हैं। वहीं, सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं।

इनमें पांच स्थायी और दस अस्थायी सदस्य होते हैं। अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन स्थायी सदस्य हैं। इन पांच देशों के पास वीटो पावर का विशेष अधिकार है। भारत अब इस व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहा है।

भारत के दावे को मजबूत करते हैं ये पांच कारण

  • दुनिया की सबसे बड़ी आबादी

भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार आबादी 146 करोड़ से अधिक है। इतनी बड़ी आबादी का वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व अहम माना जाता है। भारत इसी आधार को अपनी दावेदारी में प्रमुखता देता है।

  • तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था पिछले वर्षों में तेजी से आगे बढ़ी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही। देश की आर्थिक ताकत लगातार बढ़ रही है। इससे वैश्विक व्यापार और निवेश में भारत की भूमिका भी बढ़ी है।

  • शांति अभियानों में भारत का योगदान

भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में लंबे समय से योगदान करता रहा है। वर्ष 1950 से भारतीय सैनिक इन अभियानों में शामिल रहे हैं। अब तक करीब 2.90 लाख भारतीय सैनिक सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में भी हजारों भारतीय जवान विभिन्न मिशनों में तैनात हैं।

भारत का योगदान केवल सैनिकों की तैनाती तक सीमित नहीं रहा। भारतीय जवानों ने कई चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभाई है। इससे भारत की शांतिरक्षक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

  • परमाणु क्षमता वाला प्रमुख देश

भारत दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्तियों में शामिल है। SIPRI के आंकड़ों के अनुसार भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हैं। सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्य भी परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। भारत इसी तथ्य को अपनी दावेदारी के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखता है।

  • आठ बार अस्थायी सदस्य रह चुका भारत

भारत अब तक आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। भारत 1950-51 से लेकर 2021-22 तक अलग-अलग कार्यकाल में सदस्य रहा। अब भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए भी दावेदारी कर रहा है। सफलता मिलने पर यह भारत की नौवीं अस्थायी सदस्यता होगी।

वीटो पावर पर भी होगी अहम चर्चा

भारत की मांग केवल स्थायी सीट हासिल करने तक सीमित नहीं है। भारत सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधार की वकालत करता रहा है। स्थायी सदस्यता मिलने पर वीटो पावर का मुद्दा भी महत्वपूर्ण होगा।

भारत का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था पुरानी वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित है। आज दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक तस्वीर काफी बदल चुकी है। ऐसे में सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जगह देने की मांग तेज हुई है।

भारत को इस मांग पर कई देशों का समर्थन भी मिला है। जनवरी 2024 में एलन मस्क ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया था। हालांकि, इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति जरूरी होगी।

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