Bhagat Singh Walkathon के दौरान दिल्ली में युवाओं और स्वयंसेवकों ने पदयात्रा में हिस्सा लिया
पदयात्रा संसद मार्ग से शुरू होकर कर्तव्य पथ पर समाप्त हुई
न्यूज़म ब्यूरो
नई दिल्ली, 28 सितंबर | Bhagat Singh Walkathon का आयोजन भगत सिंह की जयंती के अवसर पर दिल्ली सरकार ने किया।
पदयात्रा में दिल्ली सरकार के कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान एक पुराने न्यायालय परिसर को भगत सिंह संघर्ष स्थल के रूप में पहचान दी गई।
समारोह में शहीदों के जीवन, संघर्ष और बलिदान को याद किया गया।

Bhagat Singh Walkathon में युवाओं ने लिया हिस्सा
शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर दिल्ली सरकार ने ‘चलो भगत सिंह के साथ’ कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के तहत संसद मार्ग से कर्तव्य पथ तक पदयात्रा निकाली गई। इसमें युवाओं, स्वयंसेवकों, दिल्ली सरकार के कर्मचारियों और नागरिकों ने हिस्सा लिया। पदयात्रा के दौरान ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए।
पदयात्रा की शुरुआत संसद मार्ग से हुई। इसके बाद प्रतिभागी विट्ठल भाई पटेल हाउस, मावलंकर सभागार, श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग और कृषि भवन से होकर कर्तव्य पथ पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति से जुड़े गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं।
Delhi Government ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं का अनावरण किया। सहकारिता एवं सामाजिक कल्याण मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पदयात्रा में शामिल युवाओं की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं और आभार भी व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगत सिंह को समर्पित इस यात्रा में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल लोगों की सक्रिय सहभागिता का उल्लेख किया। कार्यक्रम का उद्देश्य भगत सिंह के जीवन और उनके संघर्ष को युवाओं तक पहुंचाना भी रहा।
Bhagat Singh Sangharsh Sthali की नई पहचान

कार्यक्रम में संसद मार्ग स्थित एक पुराने परिसर का भी उल्लेख किया गया। मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह के अनुसार, यह स्थान भगत सिंह के जीवन और संघर्ष से जुड़ा रहा है। उनके मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह को तत्कालीन संसद मार्ग पुलिस स्टेशन से इसी परिसर में स्थित अदालत में लाया गया था। वहीं उनके मामले से जुड़ी कार्यवाही हुई थी।
मंत्री ने कहा कि संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों को एकत्र करने के बाद इन तथ्यों की पुष्टि की गई। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने इस स्थल के संरक्षण का मुद्दा उठाया। अब इस स्थान को ‘शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल’ के नाम से पहचान देने की बात कही गई है।
Historical Heritage को संरक्षित करने पर जोर
रविंदर इंद्रराज सिंह ने कहा कि यह स्थान केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं है। उनके अनुसार, इसका संबंध भगत सिंह के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन के एक महत्वपूर्ण अध्याय से है। उन्होंने कहा कि पहले इसे आरसीएस कार्यालय के नाम से जाना जाता था। अब इसे भगत सिंह संघर्ष स्थल के रूप में पहचान देने का निर्णय लिया गया है।
इस पहल के साथ सरकार की ओर से स्थल से जुड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड और विरासत को संरक्षित करने की बात सामने आई है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को भी रखा गया। इससे जुड़ी आगे की संरक्षण प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।
Kartavya Path पर सांस्कृतिक कार्यक्रम

पदयात्रा के कर्तव्य पथ पहुंचने के बाद देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके बाद भगत सिंह के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर आधारित प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उनके जीवन से जुड़े प्रमुख प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया।
मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह ने युवाओं से शहीदों के आदर्शों और राष्ट्र के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं में पैदा हुई देशभक्ति की भावना को बनाए रखना जरूरी है। कार्यक्रम का समापन इसी संदेश के साथ हुआ कि शहीदों के विचारों और योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।
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